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रूप बड़ा या गुण

 रूप तुम्हारे हाथ नहीं  गुण है तेरे हाथ  एक दिन रूप ढ़ल जाएगा  गुण सदा रहेगी साथ  रूप वाले रूपवान कहलाते  गुण वाले गुणवान  रूप भले ही ढलती जाए  गुण का रखना ध्यान  रूप से कोई महान नहीं  गुण से होता महान  गुणों के कारण ही जग में  मिलता है सम्मान  सुगंधित जो फूल नहीं  उसकी क्या है पहचान  सुगंधित जो फूल है  वही चढ़े भगवान रूप गुणों के टक्कर  सदा गुण की होती जीत  यही हमारी परंपरा  यही हमारी रीति 

बड़ा बेटा

आज के समाज में बेटा  बड़ा होना अभिशाप है  कल तक थी ये पुण्य की बाते  आज मगर ये पाप है  भाई-बहन की बातेँ छोड़ो  माँ-बाप भी कतराते है  कल तक जो था दायित्व निभाता  आज उसी को सब सताते है  करूँ विवाद तो किससे मैं  यह सोच सोच घबराता हू   रिश्ता कैसे स्वार्थ से हरा  देख- देख शर्माता हू  एक प्रश्न  है प्रभु से मेरी  क्या बड़ा बेटा इंसान नहीं  सदा दायित्व निभाता जग में  क्या इसका कोई सम्मान नहीं 

इंसान क्यों बदल गया

 कल रात मुझसे चांद ने ऐसा कुछ सवाल किया  मैं वही खड़ा हू इंसान क्यों बदल गया - 2 क्यों भाई को भाई से आज प्यार नहीं है  क्यों बहनों की राखियाँ वज़ूद को रो रही है  क्यों माँओं के आँखों में आंसुओ की धार है  मैं वही खड़ा हू बदल गया संसार है  कल रात मुझसे चांद ने ऐसा कुछ सवाल किया मैं वही खड़ा हू इंसान क्यों बदल गया - 2 लोगों के बीच मे विश्वास का अभाव है  अनीतिया कुरीतियों का हर तरफ प्रभाव है  शक के दायरे में लोग सभी जी रहे  अपने ही आँसू को घुट घुट पी रहे  झूठ और फरेब का हर तरफ राज है  मै वही खड़ा हू बदल रहा समाज है  कल रात मुझसे चांद ने ऐसा कुछ सवाल किया मैं वही खड़ा हू इंसान क्यों बदल गया - 2 जिंदगी और मुश्किलें हर जगह संग है  किसकी नजर लगी जो खो गया उमंग है  ऊपर वाले अब तेरी ही आस है  तू ही कुछ करेगा ये मेरा विश्वास है  छोड़ कर इंसान को इंसानियत चल गया   मै वही खड़ा हू इंसान क्यों बदल गया  कल रात मुझसे चांद ने ऐसा कुछ सवाल किया मैं वही खड़ा हू इंसान क्यों बदल गया - 2

ये दुनिया बड़ी मतलबी है

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प्रतिज्ञा

 सागर में मोती बहुत है  उतारने की हिम्मत जुटाओ  यूं कब तक किनारे बैठे रहोगे  आओ तुम भी मेरे संग आओ  मैं भी कभी था मुंह तका  पर अब गया जिंदगी को जान  तुम भी यूं ना समय गवा  अपने होने का कारण पहचान  साथ साथ चलना है हमको  आओ हम यह मिलकर ठाने  फिर क्या पर्वत और क्या सागर  इसे चुनौती हम क्यों माने  हम जीतेंगे हर मुसीबत  साथ  यूं ही चलते रहे  दुनिया की क्यों परवाह करे   वह कहता है तो कहते रहे लोग तुम्हें बहुत कुछ कहेंगे  इसमें बोलो क्या है नया  लेकिन हमको ये पता हो  गलत है क्या और सही है क्या