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Know your pan card (अपने पैन कार्ड को जाने)

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   PAN  (Permanent Account Number) आपके पास उपलब्ध महत्वपूर्ण डाक्यूमेंट्स में से एक है तथा यह कार्ड के रूप में होने के कारण पैन कार्ड से जाना जाता है।    PAN Card  पर दस डिजिट का एक विशेष  alphanumeric नंबर होता है जिसमें हमारी कई जानकारियां निहित होती है। पैन कार्ड में पहला  पाच अक्षर alphabetical, फिर 4  numeric तथा last मैं alphabetical  होता है।   पैन कार्ड में पहले तीन नंबर AAA से ZZZ तक  कुछ भी हो सकता है। यह NSDL द्वारा rendomly allot किया जाता  हैं। चौथा latter इंग्लिश अल्फाबेट होता है जो पैन कार्ड होल्डर का स्टेटस बताता है। P for Individual H for Hindu Undivided Family C for Company F for Firm A for Association of Person (AOP) T for Trust B for Body of Individual (BOI) L for Local J for Artificial Judicial Person G for Government      Fifth letter  भी अंग्रेजी का ही होता है जो आपके उपनाम  का पहला अक्षर होता है।      इसके बाद का चार नंबर जो न्यूमैरिक होता है व...

10 most common leaves with their medical values (10 सामान्य रूप से पाए जाने वाले पत्ते और उस के औषधीय गुण)

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1. नीम नीम की 10-12 पत्तियों को पीसकर सुबह खाली पेट पीने से गर्मी की घमोरियां नष्ट हो जाती है और चर्म रोग का भी दमन होता है। नीम की पत्तियों को पानी में उबालकर सिर धोने से बाल का झड़ना रुक जाता है एवं जुए लीख आदि मर जाते हैं। 2. तुलसी तुलसी के आठ से दस पत्तियों को पीसकर चीनी में मिलाकर पीने से लू नहीं लगती है। अगर लू लग गई है तो इसमें आराम मिलता है। रोज प्रातः खाली पेट तुलसी के 4 पत्ते नियमित रूप से खाने से बहुत सारी बीमारियों से आराम मिलता है। 3. बैर बेर की पत्तियों को नीम की पत्तियों के साथ बारीक पीसकर उसमें नींबू का रस मिलाकर बालों में लगाने से तथा उसके 2 घंटे बाद बालों को धो लें। इसका एक माह तक प्रयोग करने से नए बाल उग आते हैं तथा बालों का झड़ना बंद हो जाता है।  4. बरगद बर के पत्तों से निकलने वाले दूध में एक नींबू का रस मिलाकर उसे आधे घंटे सिर में लगाकर रहने दे फिर सिर को गुनगुने पानी से धो लें इससे बाल का झड़ना बंद हो जाता है और बाल तेजी से बढ़ते हैं। 5. बबूल बबूल की पत्तियों को उबालकर उसे पानी में मिलाकर कुल्ला करने से दांत व मसू...

VALUES OF PITRU PAKSHA पितृ पक्ष का महत्व

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पौराणिक मान्यताओं के अनुसार आपके पितर। अर्थात पूर्वज पितृपक्ष  में स्वर्ग से उतरकर पृथ्वी पर आते हैं और ऐसे समय में विधिपूर्वक श्राद्ध एवं पिंडदान करने से उनकी आत्मा को शांति मिलती है तथा वे आपको आशीष देते हुए स्वर्ग लोक को लौटते हैं।    वैसे तो दिवंगत परिजन की मृत्यु की तिथि को ही पिंड दान की परंपरा है लेकिन अगर किसी को तिथि का सही अनुमान नहीं हो तो निम्न तिथियों का चयन किया जा सकता है:- 1.    पिता के लिए अष्टमी। 2.    माता के लिए नवमी। 3.    दुर्घटना या अकाल मृत्यु पर चतुर्दशी। 4.    साधु संतों के लिए द्वादशी। 5.    सुहागिन महिला के लिए नवमी। इस वर्ष प्रतिपक्ष 13 सितंबर से प्रारंभ होकर 28 सितंबर तक चलेगा। इस दिन आप ब्राह्मणों को बुलाकर अपनी क्षमता एवं पूर्वज की पसंद के अनुसार भोजन बनाकर उन्हें खिलाएं जाने अनजाने में हुई गलतियों के लिए क्षमा मांगे । इस दिन आप पशु पक्षियों को भी भोजन दे सकते हैं।